मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

मनुष्य जड़ है अभी ,लेकिन उसके भीतर आत्मा सो ई हुई है ,वह जाग सकती है !जीवन मैं हमारे भय ,घृणा ,हिंसा ,क्रोध ,प्रेम वे सब घटित हो रहें हैं ,उन परहमारा काबू नहीं है !उनके प्रति काबू होना तो दूर हमें कोई होश भी नहीं है कि क्या हो रहा है इसलिए मैंने कहा कि मनुष्य यंत्र है !मशीन से जाकर यह नहीं कहता हूँ कि मशीन तुम मशीन हो ,मनुष्य से यह कहा जा सकता है कि तुम मशीन हो कोई मनुष्य यदि इस सत्य को समझ ले तो यन्त्र होने के ऊपर भी उठ सकता है !

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