मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

मैं उन्हें आत्महत्या सिखाता हूँ जिसमें वे एक अधिक प्रकाशयुक्त एक बड़ी महिमा के एक अपार परम -आनंद के जीवन में पुनर्जन्म लेते हैं !आत्महत्या से मेरा अर्थ है कि जैसा अर्थहीन जीवन हम जी रहे हैं ,उसे ऐसे छोड़ दें जैसे एक मृत देह!एक अर्थ पूर्ण आकाश में अपने पंख खोलें ,और जैसी आवश्यकता आज के युग को है निर्थकता के बोध से उभरने की आज से पहले कभी नहीं थी !    

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